भू-विज्ञान और खनन

उपग्रह प्रतिबिंब-चित्र भू-विज्ञान के क्षेत्र मेंकई तरह के अनुप्रयोग प्रदान करते हैं, उदाहरणार्थ- भौगोलिक एवं भू-आकृति मापन, जलभूवैज्ञानिक, खनिज अन्वेषण, खनन गतिविधियों की निगरानी, इंजीनियरिंग भूविज्ञान, पर्यावरणीय भूविज्ञान, भूजोखिम आदि। भूविज्ञान समूह, एनआरएससी, राज्यों और क्षेत्रीय सुदूर संवेदन केंद्रों की सक्रिय भागीदारी से विविध केंद्रीय मंत्रालयों, जैसे - खान, परमाणु ऊर्जा विभाग, कोयला,इस्पात, पेट्रॉलियम और प्राकृतिक गैस, बिजली, पेय जल एवं स्वच्छता मंत्रालय के साथ परियोजना पर काम करता रहा है। राज्य सरकार के संगठनों,सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और निजी उद्योगों जैसे- एनएचपीसी, रिलायंस गैस, इंडियन ऑयल कार्पोरेशन, बीसीसीएल आदि के लिए कई अनुप्रयोग परियोजना चलाई गई। समूह की गतिविधियों को भौगोलिक मानचित्रण, भूमिगत जल, खनिज अन्वेषण, भूजोखिम और भूपर्यावर्णीय अध्ययनों में विभाजित किया जा सकता है।

उपलब्धियां

  • भूमिगत जल की संभावना का मानचित्रण
  • एनजीएलएम परियोजना
  • कोयले की आग का मानचित्रण- वायुवाहित और उपग्रह ऊष्मीय सुदूर संवेदन आंकड़ों के प्रयोग से कोयला क्षेत्र का मानचित्रण किया गया जिससे भारत के कोयला क्षेत्र रानीगंज और झा रिया में उच्च तापमान अनियमित क्षेत्र की पहचान करने में मदद मिली और कीमती जीवाश्म ईंधन की क्षति होने से रोका गया।
  • वैज्ञानिक उपकरणों को प्रचालनात्मक बनाना- जीपीआर और स्पेक्ट्रमी विकिरणमापी प्रयोगशाला की स्थापना की गई जिन्हें क्रमशः उप-सतही संरचना और खनिज स्पेक्ट्रमदर्शी की पहचान के लिए उपयोग किया जा रहा है। भारत के विभिन्न भूवैज्ञानिक प्रांतों में बॉक्साइट, सोना, हीरा, चूना-पत्थर और क्रोमाइट के मानचित्रण हेतु उन्नत बहु-स्पेक्ट्रमी हाइपरस्पेक्ट्रमी आंकड़ों के साथ साथ उपकरण से प्राप्त आंकड़ों का प्रयोग भी किया गया।
  • वायुचुंबकीय सर्वेक्षण- वायुचुंबकीय आंकड़ा खनिज और तेल अन्वेषण अध्ययनों के लिए आधारभूत आंकड़ा तैयार करता है। ये आंकड़ा आधार एनआरएससी द्वारा प्रयोक्ता के लिए अभिग्रहण किया गया जैसे- ओएनजीसी, डीजीएच और जीआईएस।
  • आपदा प्रबंधन सहायता
  • संस्थागत सहयोग-
    • भूस्खलन अध्ययनों और हाइपर-स्पेक्ट्रमी आंकड़ा विश्लेषण पर एनआरएससी-जीआईएस सहयोग
    • जलविद्युत परियोजनाओं के लिए भूवैज्ञानिक मानचित्रण हेतु एनआरएसी – एनएचपीसी सहयोग
    • एनजीएलएम परियोजना पर एनआरएससी- जीआईएस सहयोग
    • एनआरएससी-जीएसआई-आईटीसी (नीदरलैंड) - इस सहयोग से भूस्खलन की स्वचालित पहचान हेतु कार्य प्रणाली का विकास संभव हुआ।
    • इसरो-नासा सूक्ष्मतरंग उपग्रह- एनआईएसएआर
    • खनिज अन्वेषण पर इंडो-एफआरजी सहयोग
    • 3डी जलभृत मानचित्रण और भूमिगत जल आकलन पर एनआरएससी – टीडब्ल्यूएडी सहयोग
  • राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल
    • अप्रैल 2015 में नेपाल भूकंप के बाद काठमांडु में भूकंप के प्रभाव के अध्ययन के लिए एनडीईएम प्रतिनिधिमंडल में इसरो, जीएसआई, आईएमडी, डब्ल्युआईएचजी, सीडब्ल्युसी के सदस्य शामिल थे।
    • भूस्खलन और भूकंप पर विविध समितियों में एनडीएमए का योगदान
  • भूगर्भ विज्ञान- हिमालय में दो कोर्स (निरंतर प्रचालित अभिग्राही स्टेशन- CORS -continuously operating receiver station) स्थापित किया गया।
  • क्षमता निर्माण- मंत्रालयों / विभागों को विविध विषयों जैसे- जल ग्रिड संरेखन अध्ययन, हाइपर-स्पेक्ट्रमी और सूक्ष्मतरंग आंकड़ा विश्लेषण, भूस्खलन और भूकंप आपदा शमन अध्ययन आदि में प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
  • कुल अनुसंधान प्रकाशन- लगभग 40 प्रकाशन पीयर समीक्षा जरनल में प्रकाशित हुये

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