ब्रेडक्रम्ब्स

नीति

सुदूर संवेदन आंकड़ा नीति(आरएसडीपी)

भारत से सुदूर संवेदन उपग्रह के प्रचालन के लिए, मुख्य (नोडल) एजेंसी के माध्यम से, सरकार से लाइसेंस और / या अनुमति आवश्यक होगी। राष्ट्रीय प्रतिबद्धता और "सार्वजनिक हित" के रूप में, सरकार अपने स्वयं के भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रह (आईआरएस) कार्यक्रम से निरंतर / अवलोकन/इमेजिंग क्षमता में सुधार करने का आश्वासन देती है। भारत सरकार, नोडल एजेंसी के माध्यम से, आईआरएस से एकत्र / प्राप्त सभी आंकड़ों (डेटा) का एकमात्र और अनन्य मालिक होगा । सभी प्रयोक्ताओं को उक्त आंकड़ों (डेटा) का उपयोग करने और उपग्रह आंकड़ों (डेटा) में मूल्य जोड़ने के लिए केवल एक लाइसेंस प्रदान किया जाएगा। सरकार के पास आईआरएस या किसी अन्य भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रह से बिंबन कार्यों और आंकड़ों (डेटा) के वितरण पर नियंत्रण लगाने का अधिकार है, जब यह राय होगी कि राष्ट्रीय सुरक्षा और / या अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों और / या सरकार की विदेशी नीतियों के लिए इसकी आवश्यकता है।
 
भारत के भीतर सुदूर संवेदन आंकड़ों (डेटा) के अभिग्रहण / वितरण के लिए, नोडल एजेंसी के माध्यम से, भारत सरकार से लाइसेंस / अनुमति आवश्यक होगी। भारत में उपग्रह सुदूर संवेदन डेटा प्राप्त करने / वितरित करने के लिए एजेंसियों के चयन और अनुमति का अधिकार सरकार को है । अंतरिक्ष विभाग ऐसे आंकड़ों (डेटा) के वितरण के लिए लाइसेंस / अनुमति प्रदान करने की प्रक्रिया के बारे में निर्णय लेने और आवश्यक शुल्क लेने के लिए सक्षम होगा ।
 
देश की विकासात्मक जरूरतों को पूरा करने के लिए, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) / अं.वि.के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी) को भारतीय और विदेशी उपग्रह दोनों से, सभी उपग्रह सुदूर संवेदन आंकड़ों को भारत में प्राप्त करने और वितरित करने का अधिकार निहित है ।