विहंगावलोकन


ISRO का नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC), प्रोफेशनल्स, रिसर्चर्स, फैकल्टी और स्टूडेंट्स की ट्रेनिंग के लिए अर्थ ऑब्जर्वेशन, रिमोट सेंसिंग और जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजीज़ में दशकों का अनुभव लेकर आता है। NRSC उन साइंटिस्ट्स और इंजीनियर्स से सीधे सीखने के मौके देता है जो ऑपरेशनल और रिसर्च एनवायरनमेंट में इन टेक्नोलॉजीज़ के साथ काम करते हैं। NRSC का ट्रेनिंग प्लानिंग एंड कोऑर्डिनेशन डिवीजन (TPCD) जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजीज़ और उनके इस्तेमाल पर केंद्रित कई तरह के ट्रेनिंग कोर्स ऑफ़र करता है। ट्रेनिंग कोर्स, वर्कशॉप और वेबिनार कैपेसिटी बिल्डिंग और सैटेलाइट-बेस्ड रिसर्च को बढ़ावा देने और असरदार फ़ैसले लेने की प्लानिंग पर केंद्रित होते हैं। सेंट्रल और स्टेट गवर्नमेंट डिपार्टमेंट्स के अधिकारियों के लिए ISRO DMSP, अमृत 2.0 और नेशनल वॉटर मिशन जैसी नेशनल पहलों के तहत इंस्टीट्यूशनल कैपेसिटी बनाने के लिए कस्टमाइज़्ड ट्रेनिंग प्रोग्राम भी चलाए जाते हैं। इसके अलावा, डेटा विज़ुअलाइज़ेशन और प्रसार के लिए "भूनिधि - ISRO का डेटा हब" और "भुवन - ISRO का इंडियन जियोपोर्टल" जैसे ऑनलाइन ट्रेनिंग प्रोग्राम भी चलाए जाते हैं। इन पहलों का मकसद ऑपरेशनल वर्कफ़्लो, साइंटिफिक रिसर्च और एप्लीकेशन प्रोजेक्ट्स के लिए जियोस्पेशियल डेटा के असरदार इस्तेमाल को आगे बढ़ाना है।

जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी क्यों?
क्योंकि पृथ्वी बदल रही है – और बेहतर फ़ैसलों के लिए बेहतर स्थानिक (स्पेशियल) जानकारी की ज़रूरत होती है।
रिमोट सेंसिंग, GIS, पोजिशनिंग और जियो-वेब इन्फॉर्मेशन सर्विसेज़ सहित जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजीज़, एडवांस्ड स्पेशल इन्फॉर्मेशन सिस्टम को लागू करने के लिए ज़रूरी हो गई हैं। ये टूल्स स्पेशल और नॉन-स्पेशियल डेटा को कैप्चर करने, हासिल करने, एनालाइज़ करने और समझने के लिए तरीक़े विकसित करने में मदद करते हैं। दुनिया भर में, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजीज़ फ़ैसला लेने वालों को नेचुरल रिसोर्स मैनेजमेंट, पर्यावरण की निगरानी, ​​आपदा न्यूनीकरण, गवर्नेंस और सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लिए स्पेशल डेटा का असरदार ढंग से इस्तेमाल करने में सक्षम बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं।

मुख्य इस्तेमाल के क्षेत्र:
🌾 कृषि – फसलों की निगरानी। उत्पादकता का आकलन। सटीक खेती (precision agriculture) में मदद।
💧 जल संसाधन – जल संसाधनों का नक्शा बनाना। वाटरशेड की निगरानी। योजना बनाने में मदद।
🌳 पर्यावरण और पारिस्थितिकी – इकोसिस्टम, ज़मीन की सतह (land cover) और पर्यावरण में बदलावों को देखना।
🌋 आपदा प्रबंधन – पृथ्वी की लगभग रियल-टाइम निगरानी का इस्तेमाल करके तैयारी, प्रतिक्रिया और रिकवरी में मदद।
🏙 शहरी और बुनियादी ढांचा – यह समझना कि शहर कैसे बढ़ते हैं और बुनियादी ढांचे में कैसे बदलाव आते हैं।
⛰ भू-विज्ञान (Geosciences) – ज़मीन की बनावट, खनिजों, भू-विज्ञान और प्राकृतिक संसाधनों की जांच के लिए सैटेलाइट से मिली जानकारी का इस्तेमाल।

पेश किए जाने वाले कोर्स: अलग-अलग कामों में असरदार इस्तेमाल के लिए ज़रूरी जानकारी देने के मकसद से पेशेवरों/शोधकर्ताओं के लिए क्लासरूम और वेबिनार मोड में खास और कस्टमाइज़्ड कोर्स आयोजित किए जाते हैं। हम हर साल लगभग 20 ट्रेनिंग प्रोग्राम के ज़रिए करीब 500 अधिकारियों/अकादमिक विद्वानों को क्षमता निर्माण (capacity building) की ट्रेनिंग देते हैं। ज़्यादा जानकारी के लिए ट्रेनिंग कैलेंडर देखें।

यूज़र कम्युनिटी: अलग-अलग सरकारी / इंडस्ट्री / स्वायत्त संस्थाओं / NGO के पेशेवर; और जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी और उसके इस्तेमाल के क्षेत्र में काम करने वाले शैक्षणिक संस्थानों के फैकल्टी और शोधकर्ता ट्रेनिंग के लिए आवेदन कर सकते हैं।