वार्षिक फसल भूमि सूचना

वार्षिक फसल भूमि (क्रॉपलैंड) उत्पाद, बहु-कालिक एविफ्स परियोजना का उपयोग करके 1: 2,50,000 पैमाने पर राष्ट्रीय स्तरीय एलयूएलसी मानचित्रण के तहत 56 मीटर विभेदन पर तैयार किए गए भूमि उपयोग भूमि आवरण (एलयूएलसी) सूचना-बहिर्वेश (आउटपुट) का एकीकृत परिणाम थे। इस अध्ययन में फसल पैटर्न और अन्य भूमि आवरण वर्गों में स्थानिक और कालिक परिवर्तनशीलता को संबोधित करने हेतु खरीफ (अगस्त-नवंबर), रबी (जनवरी-मार्च), जायद (अप्रैल-मई) मौसमों को आवरित करने वाले बहु कालिक एविफ्स आंकड़ों का उपयोग किया गया।

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विस्तृत बैंड हिम श्वेतिमा (ऐल्बिडो)

विस्तृत बैंड हिम श्वेतिमा (ब्रॉड बैंड स्नो ऐल्बिडो), मौसम, जलवायु और जलमौसम विज्ञान आदि से संबंधित अध्ययनों के लिए एक महत्वपूर्ण भूभौतिकीय प्राचल है। प्रकृति में हिम की श्वेतिमा (ऐल्बिडो) सर्वाधिक है और इसलिए धरातलीय ऊर्जा बजट और पृथ्वी के विकिरणी संतुलन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है।

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जल निकायों का अंश

जल निकायों में सभी सतही जल निकाय शामिल हैं, जैसे जलाशय, सिंचाई टैंक, झीलें, तालाब और नदियाँ/धाराएँ। जल निकायों के अंतर्गत क्षेत्र की प्रकृति गतिशील होती है, इसलिए निगरानी के लिए बहु-कालिक उपग्रह डेटा का उपयोग किया गया। रिसोर्ससैट-1, रिसोर्ससैट-2 AWiFS सेंसर (56 मीटर स्थानिक विभेदन) से प्राप्त उपग्रह डेटा के त्वरित प्रसंस्करण के लिए एक स्वचालित निष्कर्षण एल्गोरिथम विकसित किया गया है, जो जल निकाय परत के निर्माण को सक्षम बनाता है।

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दावानल रेज़ीम

वर्ष 2003 से 2017 तक के मोडिस फ़ायर अभिलेखों का उपयोग करके भारत पर फ़ायर रेज़ीम का विश्लेषण किया गया। इस विश्लेषण में 2003 - 2017 की समयावधि के लिए एक्वा मोडिस दिवाकाल (डेटाइम) फ़ायर का उपयोग किया गया। इस विश्लेषण में केवल 10% से अधिक संसूचन विश्वास्यता वाले और एनआरएससी वन अंश परत का उपयोग करके वन के रूप में चिह्नित संसूचनों का उपयोग किया गया।

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वन आवरण अंश

दीर्घकालिक वन आवरण परिवर्तन से संबंधित व्यापक अध्ययनों की अल्पता के कारण पृथ्वी पर विद्यमान कई महाद्वीपों के लिए वैश्विक वन आवरण (global forest cover) की स्थिति में बड़ी अनिश्चितता है। वर्तमान कार्य का उद्देश्य भारत के वनों में हुए ऐतिहासिक परिवर्तनों का वर्णन और मात्रा का निर्धारण करने वाले राष्ट्रव्यापी बहु-कालिक (multi-date) वन आवरण डेटाबेस तैयार करना है।

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वन प्रकार ग्रिड

वनस्पति वर्गीकरण कार्बन संचय (स्टॉक), जैव विविधता, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग और वैश्विक परिवर्तन को समझने के लिए एक पूर्वापेक्षा है। इस अध्ययन ने 2013 के बहु-ऋत्वीय रिसोर्ससैट-2 उन्नत विस्तृत क्षेत्र संवेदक (एडवांस्ड वाइड फील्ड सेंसर-AWiFS) आंकड़ों के आधार पर भारत के वन प्रकारों को वर्गीकृत किया है।

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जलवैज्ञानिक (हाइड्रोलॉजिकल) उत्पाद

पूरे देश के लिए 9 मिनट (~16.5 कि.मी. और 13709 ग्रिड) ग्रिड स्तर पर जलवैज्ञानिक (हाइड्रोलॉजिकल) प्रतिरूपण (चर अंतःस्यंदन क्षमता प्रतिरूप/वैरिएबल इन्फिल्ट्रेशन कैपेसिटी मॉडल)) ढांचा स्थापित किया गया है। सम्पूर्ण देश के लिए मॉडल विशिष्ट सूचना-निवेश (इनपुट) प्राचल (मृदा, वनस्पति, अनुमार्गण) 9 मिनट ग्रिड स्तर पर तैयार किए जाते हैं। विभिन्न स्रोतों से ऐतिहासिक मौसम विज्ञान आंकड़े (1951-2013) व्यवस्थित किए गए हैं और वीआईसी मॉडल विशिष्ट मौसम विज्ञान सूचना-निवेश (इनपुट) तैयार किए गए हैं।

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भारतीय मृदा डेटासेट

मृदा गुणधर्म (मृदा की गहराई, मृदा गठन, मृदा कार्बन), पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं, पादप वृद्धि, जल की उपलब्धता और कार्बन संचय को बनाए रखने में इनकी प्रमुख भूमिका के लिए महत्वपूर्ण हैं। मृदा गहराई को शिली (लिथिक) या पैराशिली संपर्क (यूएसडीए मृदा सर्वेक्षण मैनुअल) तक की गहराई (सेमी में) के रूप में परिभाषित किया गया है। मृदा गठन, मृदा में विभिन्न आकार के कणों, जैसे रेत, गाद और मिट्टी के सापेक्ष अंश को इंगित करता है। मृदा गठन इस बात को प्रभावित करता है कि मृदा को कितनी आसानी से जोता (बुवाई की) जा सकता है, यह जल और वायु की कितनी मात्रा धारण कर सकती है, और किस दर से जल मृदा में प्रवेश कर सकता है और उसमें से होकर गुजर सकता है।

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भूमि निम्नीकरण

जल निकायों में सभी सतही जल निकाय शामिल हैं, जैसे जलाशय, सिंचाई टैंक, झीलें, तालाब और नदियाँ/धाराएँ। जल निकायों के अंतर्गत क्षेत्र की प्रकृति गतिशील होती है, इसलिए निगरानी के लिए बहु-कालिक उपग्रह डेटा का उपयोग किया गया। रिसोर्ससैट-1, रिसोर्ससैट-2 AWiFS सेंसर (56 मीटर स्थानिक विभेदन) से प्राप्त उपग्रह डेटा के त्वरित प्रसंस्करण के लिए एक स्वचालित निष्कर्षण एल्गोरिथम विकसित किया गया है, जो जल निकाय परत के निर्माण को सक्षम बनाता है।

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एमएम-5 (MM-5) के लिए मध्यम-पैमाना (मेसो स्केल) संगत सूचना-निवेश (इनपुट)

मध्यम-पैमाना (मेसोस्केल) मॉडल (एमएम5 एवं डब्ल्यूआरएफ) के सूचना-निवेश (इनपुट) के रूप में भारतीय क्षेत्र पर IRS-P6 एविफ्स व्युत्पित ग्रिड-आधारित भूमि उपयोग/भूमि आवरण (LU/LC) आंकड़े। अब तक विभिन्न विभेदनों वाले आंकड़ों के साथ यूएसजीएस व्युत्पन्न वैश्विक व्यापन (कवरेज़) की 25 भूमि उपयोग/भूमि आवरण श्रेणियों का उपयोग मध्यम-पैमाना (मेसोस्केल) मॉडल संचालित करने के लिए किया गया हैं। 56m आधारभूत विभेदन के साथ IRSP6 एविफ्स व्युत्पन्न एलयू/एलसी आंकड़ों को 5,2 मिनट और 30 सेकंड विभेदन तक प्रवर्धित किया गया। यूएसजीएस आंकड़ों के भारतीय क्षेत्र को एविफ्स व्युत्पन्न आंकड़ों से प्रतिस्थापित किया गया और एमएम5 और डब्ल्यूआरएफ मॉडल के अनुकूल बनाया गया।

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डब्ल्यूआरएफ (WRF) के लिए मध्यम-पैमाना (मेसो स्केल) संगत सूचना-निवेश (इनपुट)

मध्यम-पैमाना (मेसोस्केल) मॉडल (एमएम5 एवं डब्ल्यूआरएफ) के सूचना-निवेश (इनपुट) के रूप में भारतीय क्षेत्र पर IRS-P6 एविफ्स व्युत्पित ग्रिड-आधारित भूमि उपयोग/भूमि आवरण (LU/LC) आंकड़े। अब तक विभिन्न विभेदनों वाले आंकड़ों के साथ यूएसजीएस व्युत्पन्न वैश्विक व्यापन (कवरेज़) की 25 भूमि उपयोग/भूमि आवरण श्रेणियों का उपयोग मध्यम-पैमाना (मेसोस्केल) मॉडल संचालित करने के लिए किया गया हैं। 56m आधारभूत विभेदन के साथ IRSP6 एविफ्स व्युत्पन्न एलयू/एलसी आंकड़ों को 5,2 मिनट और 30 सेकंड विभेदन तक प्रवर्धित किया गया। यूएसजीएस आंकड़ों के भारतीय क्षेत्र को एविफ्स व्युत्पन्न आंकड़ों से प्रतिस्थापित किया गया और एमएम5 और डब्ल्यूआरएफ मॉडल के अनुकूल बनाया गया।

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शुद्ध पारिस्थितिकी तंत्र उत्पादकता – GIMMS

जल निकायों में सभी सतही जल निकाय शामिल हैं, जैसे जलाशय, सिंचाई टैंक, झीलें, तालाब और नदियाँ/धाराएँ। जल निकायों के अंतर्गत क्षेत्र की प्रकृति गतिशील होती है, इसलिए निगरानी के लिए बहु-कालिक उपग्रह डेटा का उपयोग किया गया। रिसोर्ससैट-1, रिसोर्ससैट-2 AWiFS सेंसर (56 मीटर स्थानिक विभेदन) से प्राप्त उपग्रह डेटा के त्वरित प्रसंस्करण के लिए एक स्वचालित निष्कर्षण एल्गोरिथम विकसित किया गया है, जो जल निकाय परत के निर्माण को सक्षम बनाता है।

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शुद्ध पारिस्थितिकी तंत्र उत्पादकता - MODIS

कार्नेगी-एम्स-स्टैनफोर्ड दृष्टिकोण (CASA) स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र मॉडल को 2001-2014 के दौरान 5 किमी ग्रिड पर भारत के स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र और वायुमंडल के बीच दीर्घकालिक मासिक शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता (NPP), शुद्ध पारिस्थितिकी तंत्र उत्पादकता (NEP), मृदा श्वसन, मृदा कार्बनिक पदार्थ और संबंधित CO2 विनिमय मापदंडों के अनुकरण के लिए कार्यान्वित किया गया है। यह मॉडल समय-परिवर्तनशील सामान्यीकृत अंतर वनस्पति सूचकांक (NDVI), जलवायु मापदंडों (वायु-तापमान, वर्षा, सौर विकिरण) और भूमि आवरण एवं मृदा विशेषता मानचित्रों द्वारा संचालित होता है।

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शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता - GIMMS

कार्नेगी-एम्स-स्टैनफोर्ड दृष्टिकोण (CASA) स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र मॉडल को 1981-2006 के दौरान 5 किमी ग्रिड पर भारत के स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र और वायुमंडल के बीच दीर्घकालिक मासिक शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता (NPP), शुद्ध पारिस्थितिकी तंत्र उत्पादकता (NEP), मृदा श्वसन, मृदा कार्बनिक सामग्री और संबंधित CO2 विनिमय मापदंडों के अनुकरण के लिए कार्यान्वित किया गया है

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शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता - मोडिस

कार्नेगी-एम्स-स्टैनफोर्ड दृष्टिकोण (CASA) स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र मॉडल को 1981-2006 के दौरान 5 किमी ग्रिड पर भारत के स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र और वायुमंडल के बीच दीर्घकालिक मासिक शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता (NPP), शुद्ध पारिस्थितिकी तंत्र उत्पादकता (NEP), मृदा श्वसन, मृदा कार्बनिक सामग्री और संबंधित CO2 विनिमय मापदंडों के अनुकरण के लिए कार्यान्वित किया गया है

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थार रेगिस्तान क्षेत्र में धूल भरी आंधियों की निगरानी

थार रेगिस्तान क्षेत्र के शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में धूल के तूफान आम हैं। भारतीय थार रेगिस्तान क्षेत्र से विशेष रूप से गर्मियों के महीनों के दौरान बहकर आए धूल के छोटे कण पश्चिमी भारत और सिंधु-गंगा के मैदानों पर धूल के धुंध की चादर बना देते हैं। INSAT 3D और MODIS L1B उपग्रह डेटा का उपयोग करके थार रेगिस्तान क्षेत्र पर अध्ययन किया गया है। IR स्प्लिट विंडो तकनीक, सामान्यीकृत अंतर धूल सूचकांक (NDDI), रेत धूल सूचकांक, बैंड राशनिंग, संशोधित सामान्यीकृत वनस्पति सूचकांक और विभिन्न बैंड रचनाओं जैसे कई एल्गोरिदम को अन्य सुविधाओं से धूल पिक्सल को अलग करने के लिए लागू किया गया है। इन्फ्रारेड अंतर धूल सूचकांक (IDDI), स्थानिक सुसंगतता तकनीक को INSAT-3D डेटा का उपयोग करके धूल पिक्सल को अलग करने के लिए लागू किया गया है ।